मोदी रोजगार दो क्या है और यह क्यों trend में चल रहा है? Reality Check

पिछले कुछ दिनों में #modi_rogzar_do काफी trend में चल रहा है. यह सोशल मीडिया समेत सारे न्यूज़ चैनल पर छाया हुआ है. लेकिन इसकी क्या जरूरत पड़ी और यह क्यों trending चल रहा है इसी पर आज हम किस आर्टिकल में चर्चा करेंगे.

अभी हाल में अभिनव सर ने जो एक यूट्यूब चैनल चलाते हैं, परीक्षा का स्तर गिरता देख अपने चैनल पर इसे trend करने की मांग की. मैं आपको बताना चाहूंगा कि यह मुफ्त में students को सरकारी नौकरी के लिए तैयारी करवाते हैं.

इन्होंने अपने सभी विद्यार्थियों से इस सिस्टम के खिलाफ लड़ने के लिए कहा. उन्होंने social media का उपयोग करते हुए अपने सभी विद्यार्थी को इसके समर्थन में आने के लिए कहा. उन्होंने #मोद_रोजगार_दो campaign की शुरुआत की और देखते ही देखते पूरे देश से 50 lakhs से ज्यादा Tweets किए गए.

हम यह समझने की कोशिश करेंगे कि इस कैंपेन की क्या जरूरत हुई और इसका मुख्य मांग क्या थी.

आखिर मोदी रोज़गार दो कैंपेन चलाने की जरूरत क्यों पड़ी?

साल 2014 स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) वैकेंसी आई थी 14000. उसके बाद साल दर साल SSC समेत सभी सरकारी vacancy में भारी गिरावट आई साथ ही 2017 में हमें SSC में भ्रष्टाचार भी देखने को मिला. Vacancy गिरते-गिरते 2020 के notification में सिर्फ 8000 ही है. और सिर्फ परीक्षा देने वालों की संख्या ही 30 से 35 लाख होने वाली है.

2019 में आए रेलवे के 35000 पदों पर ढाई करोड़ लोगों ने आवेदन किया था. जिसका प्री एग्जाम कराने में ही सरकार को 4 महीने का समय लगा और उसकी सभी प्रक्रिया होते-होते यह 2023 हो जाएगा सरकारी नौकरियां भारत में 5 वर्षीय योजना हो गई है. आपको एक सपना देखने के लिए अनुमानित एक रात लगता है लेकिन विद्यार्थियों को सिर्फ एक 35000 की सरकारी नौकरी का सपना देखने और उसे पूरा करने में 5 साल देखते ही देखते निकल जाते हैं. खासकर तब जब आप अनारक्षित कोटे से हैं.

अब बात करते हैं कि हम परीक्षार्थियों की समस्याएं क्या है.

मुख्य रूप से बहुत से परीक्षार्थियों की आर्थिक पृष्ठभूमि मध्यवर्गीय होती है और वह और कोई विकल्प तलाशने के बजाय सीधा साधारण सरकारी नौकरी पर ध्यान करते हैं. और अपनी अपनी योग्यता के अनुसार उन सभी नौकरियों की वह तैयारी करते हैं जिसका उनको यह अनुमान होता है की यह परीक्षा मैं पास करके एक सफल कर्मचारी बन जाऊंगा और यहां से उसका संघर्ष का दौर शुरू होता है छोटे कपड़े से हैं तो वह बड़े शहरों में तैयारी करने के लिए जाते हैं और किसी भी तैयारी करवाने वाले कोचिंग इंस्टिट्यूट में दाखिला लेते हैं और अपने गुरु द्वारा वह शिक्षा लेते हैं अब समस्या यहां से शुरू होती है.

बाहर या घर पर ही रहने के कारण लोग उनसे बहुत बड़ी-बड़ी उम्मीदें लगा लेते हैं. और उनके असफल होने पर उनका मजाक उड़ाते हैं और यह कहानी हर एक युवा परीक्षार्थियों की है जो भी सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे होते हैं. क्योंकि सरकारी नौकरियों में vacancy बहुत कम आती है और इन वैकेंसी यों के लिए लाखों-करोड़ों आवेदन प्राप्त होते हैं. मान लीजिए इन सब परीक्षाओं में सफल भी होते हैं तो आपको सालों लग जाते हैं नौकरी में आने तक लेकिन इन सब तैयारियों के बीच परीक्षार्थी अपनी उम्र सपने मां बाप नातेदार रिश्तेदार सब को भूलकर सिर्फ और सिर्फ अपने सरकारी नौकरी पर ध्यान करता है लेकिन यह सपना भी उसका तब टूट जाता है जब उसे यह पता चलता है की चयन आयोग में भ्रष्टाचार हुआ है.

Modi_Rozgar_do का परिणाम क्या हुआ

सभी सरकारी परीक्षा की तैयारी करने वाले और करवाने वाले अध्यापक भी बच्चों के भविष्य के खतरे को भागते हुए मोदी रोजगार दो चैंपियन का समर्थन किया. जिससे इसके हालिया परिणाम देखने को मिले हैं उसके बाद से ही हर वैकेंसी में लगातार बढ़ोतरी हुई है और साथ ही उत्तर प्रदेश पुलिस में 9000 से अधिक पदों पर दरोगा भर्ती का नोटिफिकेशन भी जारी किया गया है. लेकिन मुद्दा यह नहीं है अभ्यार्थी और शिक्षकों की मांग परीक्षा को पारदर्शी बनाने की है जिससे बच्चों का समय और धन दोनों नष्ट ना हो

मोदी रोजगार 6 के प्रमुख मुद्दे.

1. समय अनुसार भर्ती प्रक्रिया पूरी हो

सामान्य रूप से एक छोटी से छोटी भर्ती प्रक्रिया को पूरी होने में 2 से 3 साल का समय लगता है उसके बाद भी वेटिंग लिस्ट जारी की जाती है तो यह बहुत लंबी प्रक्रिया हो जाती है तो समय पर भर्ती प्रक्रिया पूरी करना सबसे प्रमुख मांगों में से एक है

2. सभी चरणों में प्रश्नों का स्तर एक जैसा हो

बड़ी संख्या में अभ्यार्थी परीक्षा में शामिल होते हैं जिसके लिए बहुत से चरणों में परीक्षा कराई जाती है जिसमें किसी समय में क्वेश्चन का लेबल बहुत कठिन होता है और किसी चरण में प्रश्न का स्तर बहुत छोटा आता है या आसान होता है जिससे कट ऑफ बहुत बहुत हाई हो जाता है जिससे अभ्यार्थियों को उनकी मेहनत के अनुसार अंग नहीं मिल पाते हैं

3. Waiting List जारी की जाए

मुख्य रूप से बहुत से आयोग वेटिंग लिस्ट जारी नहीं करते हैं जिससे कोई अभ्यार्थी अगर एक सीट छोड़ता है तो वेटिंग लिस्ट के कैंडिडेट को उसकी जगह नौकरी मिल सके इससे विद्यार्थियों को बहुत सुविधा हो जाएगी

4. Transparency

कुछ वर्षों से एग्जाम में नॉर्मलआईजेशन देखने को मिला है और नॉर्मल आईजेशन की प्रक्रिया क्या है. इससे छात्र आज तक अवगत नहीं है. इस प्रक्रिया में उसके अंक बढ़ जाते हैं और कभी घर जाते हैं तो मुख्य रूप से नॉर्मलाइजेशन अगर पारदर्शी हो जाए तो छात्रों को बहुत सुविधा होगी.

5. Answer key परीक्षा के तुरंत बाद ही जारी हो

परीक्षा के कुछ दिन बाद ही अगर आंसर की जारी कर दी जाए तो बच्चों को अपने हैं अंको का आकलन करने में बहुत आसानी होगी और इससे वह यह पता कर पाएंगे कि उनका चयन होगा या नहीं होगा जिससे उनका परिणाम का इंतजार करने में समय नष्ट नहीं होगा जैसा कि आईआईटी जी के पेपर में होता है.

6. परीक्षा में आने वाले सवाल सही हो

पिछले कुछ दिनों से परीक्षाओं में यह देखा गया है की उन में आने वाले सवाल भी गलत है और अगर अभ्यार्थी चाहता है की वह क्वेश्चन की जांच करवाएं तो उसके लिए उसे ₹100 प्रत्येक सवाल के हिसाब से देने होते हैं इसीलिए यह बहुत जरूरी है कि परीक्षा के सभी सवाल सही हो

सारांश (Summary)

समरी के रूप में समझिए अभिनय सर जिनके कई मिलियन में यूट्यूब पर सब्सक्राइबर हैं उन्होंने बच्चों के भविष्य को देखते हुए सरकार के चयन प्रक्रिया के विरुद्ध अपनी आवाज़ उठाई है और सभी छात्रों से ट्विटर के माध्यम से अपना आक्रोश दिखाने की विनती की है जिसके नतीजतन अभी तक 5 मिलियन से भी अधिक tweet किए गए हैं और यह अभी सबसे नंबर वन पर ट्रेंड हो रहा है
ऐसी उम्मीद की जा सकती है की सरकार अब ठोस कदम उठाएगी और भर्ती प्रक्रिया में सुधार लाएगी.

Over To You (अब आपकी बारी)

मुझे कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं कि आपका इस टॉपिक पर क्या विचार है. या कोई सवाल हो तो मुझे नीचे कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं मैं पूरी कोशिश करूंगा कि आपकी हर एक सवाल का सही सही उत्तर दे पाऊं.

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